राजनैतिक अदूरदर्शिता और अनुभवहीनता व्यक्ति को हठधर्मी और लोभी, कायर बना देती है,। ऐसा व्यक्ति अगर किसी राजनैतिक दल के संवैधानिक पद पर है तो, सत्ता खो देने का डर उसे एक के बाद दूसरे अपराध में लिप्त करता रहता है। धीरे धीरे संवैधानिक मर्यादाएं या तो वो भूल जाता है या उसकी परवाह किया बगैर अपने स्वार्थ पूर्ति के नियम कानूनों को जनता पर लादना आरंभ कर देता है।
फिर वही हुआ जो नेपाल में हुआ। जनता के सब्र का बांध अगर टूट गया तो, आक्रोश का सैलाब आपकी जिंदगी भर की पहचान ध्वस्त कर आपको तबाह कर देता है। नेपाल का पूर्व प्रधानमंत्री ओली आज खुद को बचाने के लिए अंडरग्राउंड हुआ। ऐसा नहीं कि विश्व में सबसे पहले ऐसा नहीं हुआ, परन्तु ऐसा होने के बाद ऐसे शख्स की सत्ता वापसी कभी नहीं हुई,,,।
सोशल मीडिया पर रोक तो बहाना बन गया, दरअसल नेपाली आवाम बीते कई बरसों से शोषण सहन कर रही थी और जैसे ही मीडिया पर रोक लगी तो यही चिंगारी आग पकड़ गई।,, नेपाल में जो हुआ उससे भारत को अलग नहीं समझा जा सकता,, भले ही नेपाल अलग देश है मगर भारत की आध्यात्मिक, सामाजिक, वैचारिक, पारंपरिक, व्यापारिक रिश्ते कुछ ऐसे हैं की भारत और नेपाल को अन्य देशों के नजरिए से नहीं आंका जा सकता, नेपाल के लिए कोई बीजा पासपोर्ट, अनिवार्यता नहीं, भाषा त्यौहार और धार्मिक मान्यताएं भी एक दूसरे के सीमा में हैं,, नेपाल में सत्ता का तख्ता पलट जिन कारणों से हुआ,, ठीक वे तमाम कारण भारत में भी नजर आते हैं।
बीते दो दिन पर नज़र दौड़ाई जाए तो दिल्ली में पूर्व सैनिकों का मार्च,2017 सेअपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे देश भर के हजारों लोगों का प्रदर्शन सहित दर्जनों शहरों में सत्ता की उदासीनता के प्रति आक्रोश साफ नज़र आ रहा है,, ईश्वर करे भारत में नेपाल जैसा कोई बखेड़ा ना हो,, हमने कई विद्वानों और सुधी लोगों से चर्चा की, अधिकत तर ने भारत में कभी ऐसा ना हो पाने के अपने तर्क दिए।
मगर कोई भी शुरुआत, पहली बार ही होती है इससे इनकार नहीं किया जा सकता भारत में सत्ता भविष्य में सत्ता पर बने रहने के लिए जन सेवा या योजनाबद्ध तरीके से कार्य नहीं कर रही बल्कि,, सेवा के स्थान पर षडयंत्र कर रही है। आज भारत की तमाम व्यवस्थाओं को सत्ता ने तोड़मरोड़ डाला है, जनता को न्यायालय से न्याय के स्थान पर निर्णय मिल रहे है, संविधान के आधार पर बनी सरकार आज संविधान को ध्वस्त कर चुकी है,, तीन प्रतिशत लोगों के पर 97%संपत्ति है,, शिक्षा, स्वस्थ, रोजगार, महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों के समाधान का कोई प्रयास सरकार के एजेंडे में नहीं,, मात्र ग्यारह साल में देश 250लाख करोड़ के कर्ज में हैं,, दूसरी तरफ सत्ताधारी लोगों की अय्याशियों की रंगत, बेबस आवाम को चिढ़ा रही है।
भारत एक विशाल देश हैं,, बांग्लादेश, श्री लंका, नेपाल जो हुआ भारत में नहीं हो सकता,, हम ऐसा दावा नहीं करते,, हां ईश्वर ना करें भारत में कभी ऐसा हो यदि हुआ तो राजनैतिक दलों संगठनों को छोड़ो,, इनके कार्यकर्ता भी इसकी आग से बच नहीं पाएंगे।
भारत जो स्थिति आज बनी है उसका सबसे बड़ा कारण राजनैतिक लोगों में संवैधानिक कर्तव्य पालना कर्मठता का अभाव है यहां मुझे कहना पड़ रहा है कि देश की तमाम समस्याओं के आधार में RSS और कांग्रेस हैं,,, कांग्रेस नेतृत्व ने अपने स्लीपर सेल के कीड़ों पर कभी कोई कीटनाशक नहीं छिड़का, जिसके कारण आज कांग्रेस और विपक्ष बेजान हो गए। दूसरी तरफ RSS भी लग्ज़री हो गई, सत्ताई सुख के फेर में फंसकर RSS ने करोड़ों करोड़ों समर्पित स्वयं सेवकों और देश वासियों की जरूरत को नजरअंदाज कर, अयोग्य लोगों को सत्ता का संचालन करने दिया।
भारत में आवाम के आक्रोश से जो ज्वालामुखी बनता जा रहा है, अगर ये फूटा तो मात्र सत्ताधारी दल ही नहीं, विपक्षी संगठन,rss, अनेक भ्रष्ट जजों, बेईमान अधिकारियों, धोखेबाज उद्योगपतियों और दलाल मीडिया घरानों तक सब स्वाहा हो जाएंगे।
जिससे देश को बड़ा नुकसान होगा, आजादी खतरे में आ सकती है, विदेशी ताकतें देश के टुकड़े करने का षडयंत्र कर सकती हैं। अतः देश के हर नागरिक से हम निवेदन करते हैं कि समय रहते अपनी जिम्मेदारी, जवाबदेही और अपने संवैधानिक कर्तव्य पालना पर ध्यान दें।