हमारा भारत आजकल आज़ादी के 80 वें वर्ष में सफर कर रहा है,, दुनियां में बड़े कृषि प्रधान देश होने के बावजूद, दुनिया में हमारे हालात इतने डरावने हैं कि भुखमरी में हम 125वें स्थान पर जा पहुंचे हैं,, यानि हर दूसरा बच्चा और व्यक्ति कुपोषण का शिकार है।
ये आंकड़े मेरे नहीं बल्कि विश्व स्तरीय संस्थाओं के हैं,, एक दूसरा आंकड़ा ये भी है कि हमारे देश में जितने खाद्यान्न की जरूरत है,, उतना ही हमारे यहां अनाज रखरखाव के अभाव में सड़ या गल जाता है,, जितना अन्न सड़ता है उससे दोगुना चूहे खा जाते हैं,,, इतने के बावजूद हमारी सरकार नागरिकों को पांच किलो राशन मुफ़्त देकर नाच गा रही है।
हमारे हिमाचल और कश्मीर का सेव बाजार तक नहीं पहुंच पाता और सरकार अमेरिकी सेव बाजार में बेच रही है। कभी तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वस्तरीय विश्व विद्यालय हमारे देश की शान होते थे,, आज दुनियां की पहली 300 यूनिवर्सिटी में भी हमारा नाम नहीं आता।
हमारा आयुर्वेद किसी भी चिकित्सा प्रणाली का मुकाबला करने में सक्षम है। परन्तु अब अच्छे इलाज के लिए हमें विदेशों के अस्पतालों और तकनीक की जरूरत होती है? जबकि वहां के अस्पतालों में अधिकांश हमारे ही डाक्टर, संस्थाओं में हमारे वैज्ञानिक तथा इंजीनियर, काम करते हैं ,, भारत में एक से एक काबिल सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, मगर हमारी सरकार के कुप्रबंधन के चलते हम गूगल के यूट्यूब और फेसबुक आदि प्लेटफार्म पर रील बना रहे हैं। क्या भारत अपना गूगल जैसा सर्च इंजन ईजाद नहीं कर सकता,,, तो जवाब है कि जरूर कर सकता है, मगर हमारा सिस्टम नपुंशक है और प्रबंधन विकलांग।
दरअसल हम डेढ़ सौं करोड़ लोगों ने, देश को एक अकेले प्रधानमंत्री के हवाले छोड़ दिया है,, और हम आलसी और कामचोर नागरिक केवल भाग्य रूपी अस्तित्व भय की निष्पारिणींम चर्चा में लगे हैं। आपमें से बहुत से धूर्त कहा सकते हैं कि ये समस्याएं तो सभी को पता हैं,, इसका गीत गाने से क्या फायदा,,? तो साहब इन्हीं समस्याओं में समाधान भी छुपा है।
हमने तुलनात्मक मूल्यांकन करना बंद कर दिया। हमने श्री राम को नारों और रामलीला कमेटी के मंच तक सीमित कर दिया है ,, उनके आदर्शों का आत्मसाद नहीं किया। हमने श्री कृष्ण और राधा माँ को भौंडे नृत्यों तक या जन्माष्टमी के गोविंदा भटकी फोड़ प्रतियोगिता पर जमा दिया है।
जिस दिन श्री कृष्ण द्वारा दिए गए गीता के उपदेश स्कूलों कॉलेजों के पाठ्यक्रम में आएगे, विवेकानंद, कबीर तुलसी गांधी, और आंबेडकर के संविधान को पढ़ाया जाएगा उस दिन से देश की तमाम समस्याओं का हल हमारा जेन जेड और जेन एल्फा चंद घंटों में कर देगा।
केवल योग्य व्यक्ति को प्रतिनिधित्व दो,, किसी पार्टी या संगठन का झंडा मत उठाओ, केवल देश की खातिर राष्ट्रध्वज को थामो। स्वतंत्र देश के आजाद नागरिक हो तो अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करो। आप देश के मालिक हो,, नौकरों पर नज़र रखों, निगरानी शुरू करो, ये वेतनभोगी, चाहे IAS हो IPS,HJS हों या IRS, प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री मंत्री, भारतीय नागरिक के प्रति जवाबदेह हैं।
शायर वसीम बरेलवी ने कहा है कि बात उसूलों पे आ जाए तो, टकराना जरूरी है। अगर जिंदा हो तो, जिंदा नज़र आने जरूरी है।। इसलिए खुद को समझो,सवाल पूछो,, देश बच जाएगा। (संपादक) चक्रपाणि चक्र 8218713203