लोकवाणी समिति बोलें या ई डिस्ट्रिक्ट गवर्नेन्स,, आज के दौर की सबसे अधिक लोकप्रिय सरकारी व्यवस्था है। इस सरकारी व्यवस्था के अंदरूनी सिस्टम को बहुत कम लोग जानते हैं। अगर मैं कहूँ की ये व्यवस्था एक दिन के लिए भी थम जाए तो समूचा सरकारी सिस्टम हिल जाएगा।
जी हां, क्योंकि जिले के कई हजार , जनसेवा केंद्रों, लोकवाणी केंद्रों और मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री के शिकायत पोर्टल आदि, लगभग सभी विभागों की डिजिटल प्रणाली उक्त लोकवाणी समिति या ई डिस्ट्रिक्ट गवर्नेन्स (यूनिट) की पाइप लाइन से होकर ही गुजरती है।
आपने अखबारों, न्यूज चैनलों और न्यूज पोर्टलों पर शायद ही कभी इस व्यवस्था के बारे में कोई खबर देखी हो,, हमारा ध्यान भी कुछ लोगों की शिकायत के बाद इस तरफ गया। दरअसल जनसेवा के नाम पर, कथित जनसेवा केंद्र जनता को लूट रहे हैं। 20,30,70 रुपए सरकारी शुल्क वाले दस्तावेज के लिए केंद्र संचालक ग्राहकों से 150-2 00रुपए वसूल रहे हैं।
जबकि सरकारी शुल्क में से निर्धारित कमीशन ये व्यवस्था के तहत,केंद्र संचालक को वापिस देती है, शेष राशि से संबंधित विभाग को और ई डिस्ट्रिक्ट गवर्नेन्स के प्रबंधन में खर्च होता है।
यहां सवाल होता है कि जब केंद्र संचालकों को ई डिस्ट्रिक्ट गवर्नेन्स वापिस उसका कमीशन देता है तो फिर जनता से डेढ़ सौ, दो सौ रुपए तक की अवैध वसूली क्यों और किसके संरक्षण में? होती है। सवाल ये भी है कि ग्राहकों से हो रही अवैध/वैध वसूली GST, इंकमटैक्स के दायरे में है या नहीं? और आवाम को लुटने के लिए क्यों छोड़ दिया गया?
हालांकि हम दावा नहीं करते मगर, हमारे सूत्र ये बताते हैं कि ई डिस्ट्रिक्ट गवर्नेन्स समिति के कुछ प्राइवेट प्लेयर इस खेल में मोटा हिस्सा जन सेवा केंद्र संचालक से लेते हैं,, । ये गंभीर जांच का विषय है। क्योंकि जिले में कई हजार जनसेवा केंद्रों पर अवैध कमाई का कोई लेखा जोखा शायद नहीं हैं। प्रश्न तो ये भी है कि जनपद के उच्च अधिकारियों की जवाबदेही को भी बेधड़क दरकिनार करने वाला कौन है ?
अब आप इस सरकारी प्रणाली की गंभीरता को महसूस कर रहे होंगे । ,, जब हमने इसे समझा तो इस महत्वपूर्ण प्रणाली में भ्रष्टाचार, चापलूसी, अवैध उगाही की कई दरारें और सुराख भी सामने आए,,क्या यकीन करेंगे कि, इस खेल में संविदा पद पर तैनात,प्राइवेट प्लेयर (ई डिस्ट्रिक्ट प्रबंधक) इतना ताकतवर भी हो सकता है जो कि एक क्लास वन अधिकारी,जो इस प्रणाली का नोडल ऑफिसर भी हो,,,, को भी दरकिनार कर सकता है।,,,,?
समूचे देश में लोकप्रिय हो चुकी इस डिजिटल प्रणाली की शुरुआत 2004 में उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से एक पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई,,2011-1 2 में कुछ सुधार कर,इस लोकवाणी समिति को बुलंदशहर सहित समूचे प्रदेश में लाया गया। आपको बता दे कि world headline इस योजना की खोज बीन, एक पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में बुलंदशहर से आरंभ कर रहा है,,।
हम जिला अधिकारी श्री कुमार हर्ष IAS जी से भी निवेदन करते हैं कि वे स्वयं भी ई डिस्ट्रिक्ट गवर्नेन्स समिति के लेखा जोखा जांच लें,, कि उनके द्वारा जारी किए गए धन का सदुपयोग हुआ। या फर्जी बिलों में ही धन को डकार लिया गया।
हांलाकि उक्त ई डिस्ट्रिक्ट गवर्नेन्स समिति के चेयरमैन DM (जिला अधिकारी) खुद होते हैं और जैसा कि हम पहले जिक्र कर चुके हैं, नोडल ऑफिसर NIC (नेशनल इंफ्रामेटिक सेंटर बुलंदशहर) के उप निदेशक एवं जिला सूचना विज्ञान अधिकारी श्री मयंक गोयल जी हैं।
परन्तु जब हमने मयंक गोयल जी से इस विषय में ज्ञानवर्धन चाहा तो उन्होंने खुद को तकनीकी जानकारी तक सीमित करते हुए, ई डिस्ट्रिक्ट गवर्नेन्स समिति के प्रबंधक पीयूष चौधरी तथा LCO विजय पाल जी का नाम सुझाया। हम अपने दर्शकों को ये बताना उचित समझते हैं कि इस पूरे योजना में तकनीकी भूमिका वामयटेक और CSC नामक दो कंपनियों की है। जिले में इनका प्रबंधन अर्पित भारद्वाज और पिन्टू चौधरी संभालते हैं।
जहां तक बात पीयूष चौधरी जी की है तो वे संभवतः 2013-14 से लोकवाणी समिति से जुड़े हैं पूर्व DM बी चंद्रकला ने भी किसी मामले में पीयूष चौधरी की क्लास लगाई थी और पूर्व जिला अधिकारी सी पी सिंह के समय में खाद्य विभाग के एक मसले में पीयूष साहब काफी चर्चित रहे।,, हमारी टीम की पड़ताल अभी जारी है। जिसे हम अगली खबर में आप तक लाएंगे।
कुछ सूत्र ये भी बताते हैं कि कलेक्ट्रेट और विकास भवन के कई बाबुओं के शराब, फाइनेंस आदि में भी भूमिका है जिसे उनके परिजनों या रिश्तेदारों के द्वारा संचालित किया जाता है।,,,, अगली खबर में खुलासा करेंगे! इस खबर में अभी इतना ही। World Headline 8218713203