कार्यालय संवाददाता /05/09/2025/शुक्रवार
World headline ने खोज निकाला जिला मुख्यालय में रकबा नंबर 1180, जिसका क्षेत्रफल करीब पक्का 54बीघा है यानी कच्चा करीब 300बीघा कच्चा।
ये रकबा रोडवेज बस अड्डे से साठा मामन रोड भूतेश्वर मंदिर ऊपर कोट से लगे बाज़ार कबाड़ी बाजार, डिप्टी गंज अम्बर सिनेमा जीजीआईसी कॉलेज, पशु चिकित्सालय से रोडवेज तिराहे तक बताया जाता है

ये खबर आप को बताना इस लिए जरूरी है कि इसी रकबे के फिलहाल खाली पड़े करीब आठ या नौ बीघा बेस कीमती ज़मीन पर दो पक्ष अपना अपना मालिकाना हक जता रहे हैं,,, हमने जहां तक पाया है उक्त दोनों पक्षों के दावे एक जगह जाकर ठहर जाते हैं। वर्षों से विवादित इस भूमि पर अपना मालिकाना हक जताते हुए देवेंद्र सिंह s/o बनारसी दास इस भूमि को अपना बताते हैं। दूसरी तरफ मिश्रा बंधुओं ने इसे नगर पालिका की टैक्स रसीदों का हवाला देते हुए आपस में सिविल न्यायालय में वाद दाखिल कर आदेश ले लिया और बड़े ही चालाकी से इस जमीन का बैनामा कुछ दुकानदारों और CA आनंद मिश्रा और शराब कारोबारी आबिद अली (क्लासिक होटल वाले) की कंपनी फॉर्च्यून सिटी स्क्वेयर को कर दिया ।

इस प्रकरण में ca आनन्द मिश्रा की भूमिका से जुड़ी एक बड़ी खबर आज कल चर्चित है, जिसकी दावेदारी तो हम नहीं करते मगर बात चल रही है, की आनंद मिश्रा इस जमीन पर काबिज सौरभ, रजत (मिश्रा बंधुओं) के परिवार से जुड़े थे दूसरी तरफ रसूख दार ca होने के कारण शराब कारोबारी आबिद अली से भी इनके ताल्लुक कात थे, CA आनंद मिश्रा आबिद अली की कंपनी फार्चून सिटी में किस तिकड़मी अंदाज़ से पार्टनर बने इस बात से शायद आबिद अली आज भी अनभिज्ञ हों,,!
मिश्रा बंधुओं को वास्तव में क्या हासिल हुआ, ये कहानी फिर कभी बताएंगे।
बरहाल आबिद अली को बड़े सपने दिखा कर आनंद मिश्रा जी ने आबिद अली को शराब कारोबारी के अलावा इस झंझट में फंसा कर भू माफिया बना डाला,, ये बात हम इस लिए कह पा रहे है क्योंकि विरोधी पक्ष देवेंद्र सिंह ने लोकायुक्त महोदय के यहां फरियाद लगा कर जमीन पर काबिज मिश्रा बंधुओं,ca आनन्द मिश्रा, आबिद अली आदि के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा दी है। जिसमें इनकी गिरफ्तारी लगभग तय मानी जा रही है।

अपने रसूख का फायदा उठा कर अभी तक आनंद मिश्रा और आबिद अली बेशक पुलिस की पहुंच से बाहर हैं,, मगर सूत्र बताते हैं कि कोई भी अधिकारी अपनी नोकरी दाव पर नहीं लगता,, आदेश लोकायुक्त का है।
हमने CA आनंद मिश्रा से इस बाबत बातचीत की जिसमें उन्होंने बैनामा होने से इनकार किया,, उन्होंने हमसे कुछ दस्तावेज देखने और देने की बात कही थी, मगर बाद में कई बार करने पर भी फोन नहीं उठाया। जो मिश्रा बंधुओं के दावे को संदेह में डाल देता है।

दूसरी तरफ देवेंद्र सिंह के अधिवक्ता adv वीरेंद्र सिंह सिरोही ने हमसे बातें की जिसको हम अपने पोर्टल से जारी करेंगे। मगर देवेंद्र सिंह को सुरक्षा का हवाला देकर हमसे नहीं मिलने दिया।
अब कुछ सवाल उठते है कि मिश्रा बंधुओं ने किस आधार पर उक्त संपत्ति पर अपने अधिकार जता कर बैनामे किए?
दूसरी ओर देवेंद्र सिंह, मात्र इस जमीन पर ही अपना दावा क्यों पेश कर रहे हैं,, पूरे 54 पक्के बीघा पर क्यों नहीं ?

इस प्रकरण से जुड़ी ये जानकारी भी सामने आई है किमिश्रा बंधु सड़क के उस पार अस्तबल और मस्जिद की जमीन को अपना बताते हैं और तीन चार दुकानों को भी मिश्रा बंधु किराया वसूलते हैं।

देवेन्द्र सिंह
इस पहेली को हम सुलझाने की कोशिश करेंगे,, मगर अभी तक हम इस भूमि को सरकारी ही समझ सकते हैं। साथ ही जिला प्रशासन से उम्मीद करते हैं कि हालत संवेदन शील हैं अतः विवाद का निर्णय होने तक इस भूमि पर हुए बैनामे और बने सभी प्रतिष्ठानों/कब्जों पर सीलिंग करा कर अपने अधिकार में ले।
इसी जमीन के निकट साठा रोड पर भी एक निर्माण को bkda ने सील किया है, बताया जाता है उसमें स्थापित एक पूजनीय समाधि/मजार को ध्वस्त किया गया साथ ही राष्ट्र संपत्ति हजीरा भी क्षति ग्रस्त किया गया।

