किश्तवाड़ आज भी गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। हजारों निवासी सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं, जबकि गया था। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य था नैगाड़ नाले से पानी उठाकर, उसका शुद्धिकरण कर, किश्तवाड़ नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में घर-घर आपूर्ति करना। लेकिन 15 वर्षों के बाद भी यह परियोजना अधूरी है, जो भारी कुप्रबंधन, सार्वजनिक धन की बर्बादी और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। “यह योजना जनता के लिए जीवन रेखा बननी थी, लेकिन यह भ्रष्टाचार और असफलता का प्रतीक बन गई है। करोड़ों रुपये खर्च हो गए, फिर भी लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए आज भी पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं,” स्थानीय निवासियों ने कहा।
कई समयसीमाएँ बीत जाने के बावजूद फिल्ट्रेशन प्लांट और पाइपलाइन अधूरी हैं। राजनीतिक दबाव और ठेकेदार–विभागीय गठजोड़ के आरोप। सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे में, लोग असुरक्षित स्रोतों से पानी पीने को मजबूर। सरकारी आश्वासन विफल, जनता का प्रशासन से भरोसा टूटा।
निश्चित समयावधि में पूर्णता योजना, जिसकी निगरानी स्वतंत्र एजेंसी करे। जवाबदेही तय हो – लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई। सिविल सोसाइटी और स्वतंत्र अभियंताओं को निगरानी समितियों में शामिल किया जाए। सुरक्षित पेयजल का अधिकार – संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत सुनिश्चित किया जाए। किश्तवाड़ की जनता ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो लोग आंदोलन तेज करेंगे और न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगे। इंजि. अनिल कुमार शान