BKDA का देखो खेल,भ्रष्टाचार की रेलमपेल जनसुरक्षा की चिन्ता ना संविधान की परवाह,,ये अधिकारी हैं या अपराधी

24/10/2025/friday/

विशेष नोट: ( खोज खबर बड़ी ही होती हैं, कृपया कमेंट पढ़ने वाले अल्प बुद्धि वाले लोगों के लिए ये विस्तृत समाचार बेकार है।) प्रस्तुत है भाग*1

आज सुबह सोशल मीडिया पर दिल्ली के एक कुम्हार का वीडियो देखा, जिसके द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीए , बर्तनो आदि को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बुलडोजर ने चकनाचूर कर दिया,, अब सवाल ये है कि क्या उन अधिकारियों को पहले से अवैध निर्माण की जानकारी नहीं थी,,?

कुछ समय पहले जेवर एयर पोर्ट के पास ककोड़ नगर में अवैध कालोनियों पर बुलडोजर चला , यमुना एक्सप्रेस वे विकास प्राधिकरण और बुलंदशहर खुर्जा विकास प्राधिकरण के अधिकारीयों ने भी पूरे अमले के साथ ऐसे व्यस्तता दिखाने की जद्दोजहद की ,,जैसे वे कोई बड़ा युद्ध अभियान में फतेह के करीब हों,, ।


हमारी टीम ने जब गौर किया तो वास्तविकता की एक अलग तस्वीर सामने आई,,bkda के छोटे _बड़े अधिकारी ही खलनायक की भूमिका में नज़र आने लगे।
BKDA में उपाध्यक्ष डॉ अंकुर लाठर ias, चीफ इंजीनियर आनंद मिश्रा, कथित स्टेनो निरंजन सिंह कुछ अन्य लोग इस खेल के मकड़जाल में ,मुख्य भूमिका में नज़र आए,,


आपको याद होगा हाल ही में उत्तर प्रदेश के तात्कालिक मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, ने परम डेरी प्रकरण में NGT की तमाम गाइड लाइन को धूलधूसरित कर अपना आदेश दे दिया, जबकि NGT को सुप्रीमकोर्ट जैसे अधिकार प्राप्त है! हमारी समझ है कि कोई मुख्य सचिव तो क्या केंद्र का कोई प्रिंसिपल सेकेट्री भी ऐसी हिमाकत नहीं कर सकता,,,। तात्कालिक मुख्य सचिव की उपरोक्त भूमिका को संविधान पर हमला समझ कर,,
हाल ही में हमने खुद एक RTI डाल कर परम डेरी प्रकरण से जुड़ी कुछ जानकारी bkda से मांगी मगर,उसका गोलमोल उत्तर और एक दो को को छोड़ कोई काम का दस्तावेज bkda ने नहीं दिए,, बरहाल इस प्रकरण में हमारी कार्यवाही आगे बढ़ रही है खैर,,।


दूसरी तरफ हमारी टीम ने bkda की वर्तमान उपाध्यक्षा डॉ अंकुर लाठर ias के कार्यकाल (करीब तीन वर्ष )की कारगुज़ारियों की परतें खंगालनी आरंभ की तो,, लगा जैसे विभागीय नियमों कायदों को जन सुरक्षा, विकास और सुविधाओ के नाम पर, भूमाफिया ,कॉलोनाइजर्स और चहते ठेकेदारो के साथ मिलकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। दो रुपए के काम को दस रुपए में करवाना, 2या 3 तीन बीघा की छोटी कालोनी स्वीकृत कर, उसकी आड़ में कॉलोनाइजर्स को पीछे कच्ची कालोनी कट कर जनता को लुटवाना,, बेनामी संपत्ति पर पहले नक्शा पास कर देना, बाद में निमार्ण को रोकना तथा दोबारा रिश्वत लेकर, गलत निर्माण की स्वीकृति दे देना,, 2023 में माननीय हाईकोर्ट और बाद में माननीय सुप्रीमकोर्ट के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व आवास सचिव श्री रमेश गौकर्ण के शासकीय आदेश के बाद भी सैकड़ों मामलों में कंपाउंड के नाम पर मोटी अवैध वसूली करना,, फर्जी नामों को संविदा कर्मी बताकर सरकारी पैसा डकारा आदि आदि मामलेऔर भी हैं।
हमारे रडार पर राजस्व को हजारों करोड़ का चुना लगा कर कई सौ करोड़ के खेल को अंजाम दिया जा चुका है। जिन्हें हम धीरे धीरे आगे समाचारों में बताएंगे।
यहां हम पूर्व के वर्षों में तैनात रहे अधिकारियों को या वर्तमान अधिकारियों को ईमानदारी या बेइमानी का कोई प्रमाण पत्र नहीं दे रहे ,,,,
बल्कि वर्तमान में तैनात डॉ अंकुर लाठर ias तथा अन्य के कार्यकाल की कारगुज़ारियों को खंगाल रहे हैं।

नए प्रतिष्ठान या मकान के नक्शे की बात हो, या कच्ची कालोनी, पक्की कालोनी (प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत कालोनी) की,,।
पुनः निर्माण हो, या अवैध निर्माण आदि ।,,,,जन सुरक्षा और सुविधा के नाम पर वसूली तो होती रही है, परन्तु सुरक्षा पर कोई ध्यान, कभी दिया हीं नहीं गया। यहां ये बात भी गौरतलब है कि जब प्राधिकरण के पापियों की लापरवाही से कोई दुर्घटना आगजनी या अन्य हादसा हो जाता है तो अग्नि शमन विभाग के जवानों को जान पर खेलना पड़ता है,, । प्राधिकरण के भ्रष्टाचार के चलते कहीं दंगा फसाद हो जाए तो परेशानी पुलिस के जवानों और अधिकारियों को झेलनी पड़ती है।

जिला मुख्यालय से जुड़ने वाले हर मार्ग पर दर्जनों कच्ची या स्वीकृत कालोनी की ओट में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का खेल देखा जा सकता है।
नगर के बीचों बीच शहीद चौक के करीब ब्रह्मपुत्र कांप्लेक्स में NGT तमाम नियमों कायदों और जन सुरक्षा की अनदेखी कर, खुले 🅿️ पार्किंग के स्थान पर प्राधिकरण के लापरवाह लोगों ने, दीवार लगवाकर कब्जा करवा दिया, हालांकि ये केस अब अदालत में है, परन्तु सवाल ये है कि अगर कोई आगजनी अनहोनी की स्थिति बन जाए और लोग हताहत हों या किसी की मौत होती है तो जिम्मेदारी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की होगी ?, कब्जा करने वाले होगी ? या मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश महोदय की ?
जबकि ऐसे अति संवेदनशील मामले में ,भले ही केस चलता रहे, मगर जन सुरक्षा के मद्देनजर कब्जे की दीवार को हटाया जाना मानवीय संवेदनाओं के आधार पर जरूरी है। इस प्रकरण को हम विस्तार से आगे बताएंगे।


BKDA द्वारा खुर्जा के कालिंदी कुंज में एक पार्क को पॉटरी की क्षति ग्रस्त कबाड़ से स्थानीय नागरिकों के सहयोग से अनोखी दुनियां बनाया गया है,।
जबकि एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में खुद प्राधिकरण उपाध्यक्ष डॉ अंकुर लाठर ias महोदया ने उसकी लागत साढ़े नौ करोड़ बताई जबकि डेढ़ सौ करीगरों ने काम किया l वास्तव में इसकी लागत कितनी है ये तो जांच के बाद ही पता लग सकता है।
बुलंदशहर के गंगा नगर में भी प्राधिकरण द्वारा संवारा गया एक पार्क भी ,बेशक लोगों को आकर्षित करता है, उसमें प्रवेश शुल्क भी लगता है, मगर जब बात लागत की आती है तो,, दो का माल , दस का बिल यहां भी नज़र आता है।
एक अन्य मामले में आनंद मिश्रा जी के निर्देशन में हो रहे जीर्णोद्वार का है। रॉयल कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा यमुनापुरम स्टेडियम में निर्माणाधीन उक्त ऑल वेदर स्विंगपूल का बजट और प्रकरण भी संदेह पैदा करने वाला है।

उपरोक्त मामले तो मात्र उदाहरण हैं, ऐसे दर्जनों मामले एक एक कर,हम विस्तार से आगे आप तक पहुंचाएंगे।
ताकि आप भी समझ सकें कि सरकारी डकैत, राजस्व पर डकैती और जन सुरक्षा व संविधान से खिलवाड़ करते कैसे हैं। हमारी खबर का मकसद किसी को बेईमान या ईमानदार का प्रमाण पत्र देना नहीं बल्कि अपने संवैधानिक मौलिक कर्तव्यों और अधिकारों का बोध करा कर देश के लोकतंत्र को मजबूती देना है। सच्ची खबर अक्सर खतरनाक ही होती है,,, किसी शायर ने कहा है कि
ये शौक ए शहादत तो क्या कीजे, लो हथेली पे हमने ये सर ले लिया।
कत्ल होने से यारों कहां तक डरें,, कातिलों के मोहल्ले में घर ले लिया।।
चक्रपाणि चक्र
शेष भाग 2 में,,,।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *