सवाल RSS और BJP के अस्तित्व का..


आवाम से बेहतशा टैक्स वसूली के बाद भी विदेशों से भारी कर्ज लेकर देश की आर्थिक व्यवस्था को ही चरमरा दिया है। शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, अब बीते जमाने की बात लगते हैं, उस पर महंगाई ने लोगों को रोज़मर्रा की जरूरत में उलझा दिया है,, तमाम विश्व में कोई एक देश भी आज हमारे साथ खड़ा दिखाई नहीं देता। और तो छोड़ो जिस RSS और BJP ने 2014में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचाया आज ये दोनों संगठन अपनी साख और अस्तित्व को बचाने की सोचने लगे है,, इनकी विवशता तो इस कदर है कि जैसे सांप के मुंह में चाचूंदर फंस गई हो, जिसे निगलने से मौत और उगलने से अंधा होने का खौफ सता रहा है।

ये सच है,, दबी ज़ुबान से bjp के वे कार्यकर्ता जो वर्षों से बीजेपी की सेवा में हैं, और जो भविष्य में बीजेपी की राजनीति कर अपना भविष्य संवारने की सोच रहे थे उनको अब अपना राजनैतिक कैरियर शुरू होने से पहले ही खत्म होता नज़र आ रहा है। ऐसे कार्यकर्ताओं की संख्या लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में मानी जा रही है।


तमाम विपक्षी राजनैतिक दलों में जिस ओछी राजनीति और ED CBI जैसी सरकारी एजेंसियों का प्रयोग मोदी सरकार ने किया है,, उसको मौन समर्थन देने का आरोप RSS पर भी है।
बेहतर तो शायद यही होगा कि RSS बिना देर किए देश का नेतृत्व किसी अन्य योग्य को सौंप कर खुद पर और BJP पर लगे दागों को धो डाले, और अपनी साख को बचा ले।
क्योंकि अगर देर हो गई और जनता में बढ़ती जा रही विद्रोह की आग अगर खुद ज्वालामुखी बन कर फटी तो फिर राम ही मालिक होगा। और वक्त ही बताएगा कि कौन कहां और कैसा होगा? संपादक
चक्रपाणि चक्र 8218713203

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