संविधान की कमीज़ और मणिपुर


ये दौर कथित यशस्वी नरेंद्र मोदी जी का दौर है। आज मणिपुर को फिर से संवारने की जरूरत है मगर इस का हल खोजना है तो नरेंद्र मोदी सरकार को नेहरू सरकार से कुछ तो सीखना पड़ेगा ही,, क्योंकि 1947 में जब देश मुस्लिम हिंदुओं के दंगों को झेल रहा था,, मंदिरों में गाय काट कर फेंकी जा रही थीं और मस्जिदों में सूअर कट कर फेंके जा रहे थे,, तब एक देश के निर्माण की नींव रखने का कार्य भी आरंभ हुआ था।
1950 में संविधान के बाद जब पहला चुनाव हुआ सच में आजाद भारत की नींव तभी पड़ी, वो अभाव ग्रस्त भारत जिसमें ना व्यापारिक क्षमता थी ना औद्योगिक, कृषि भी अधिकतर बंजर थीं,, तंगहाली में एक विशाल देश का निर्माण कोई छोटी चुनौती नहीं थी Manipur भी आज लगभग उसी हाल में है।
आज नरेंद्र मोदी को खुद के अस्तित्व को साबित करने का मौका है कि वे किस कुशलता से, मणिपुर को व्यवस्थित करते हैं, और एक बार खुद को नेहरू जी से आगे और बेहतर राष्ट्र संचालक साबित कर पाते हैं। वे ऐसा कर पाएंगे? संविधान की कमीज़ पर लगे दाग धो पाएंगे? ये देखना होगा।
मगर देश के सभी राजनेताओं, उद्योगपतियों, समाज सेवकों और पत्रकारों से अपेक्षा जरूर रहेगी कि वे अपनी कमीज़ और चेहरे के दाग धोते वक्त संविधान की कमीज़ और उसके चरित्र को भी साफ रखें।
संपादक
चक्रपाणि चक्र 8218713203

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